महाभारत बिना युग परिवर्तन

मैंने भी एक कविता लिखा था,

एक ऐसी कविता जो सबको झकझोर दिया था,

एक ही कविता समाज के अंतिम पायदान को बयाँ करती,

एक ही कविता जो राष्ट्रीय स्तर पर छपी भी थी।

दस साल बीत गए,

समाज की दशा बदलते-बदलते। 

जद्दों-जहद के इस सफर में,

हार-जीत के बीच हिंडोले लेते।

आज पुनः एक कविता लिखना चाहता हूँ। 

एक ऐसी कविता जो तुफाँ बन सबको झकझोर दें,

एक ऐसी कविता जो चिंगारी बन सबके दिलों में आग लगा दें,

फिर वही आग मशाल बन युग परिवर्तन ला दें।

एक ऐसी कविता जो युवाओं में अर्जुन-सा तेज भर दें,

सबको भीम-सा बना दें, जो बकासुर का दम तोड़ दें,

एक ऐसी कविता जो युधिष्ठिर-सा सबमें धर्म जगा दें,

समाज के दुर्योधनों की सत्ता को हिला दें,

एक ऐसी कविता जो महाभारत बिना ही धर्म-राज्य बना दें।

हे कृष्ण, आज यह कैसा चक्र चल रहा है,

मज़दूर-मालिक एक दूसरे से दूर हो रहे हैं।

पढ़ा-लिखा वर्ग मोटर गाड़ी में घूमते हैं,

मज़दूर जाड़ा-गर्मी-बरसात में साईकिल से रेंगते हैं।

इंजीनीयर, डॉक्टर, एसपी-कलेक्टर और पुलिस इंस्पेक्टर,

कंट्रेक्टर, दुकानदार और इन सबके तीमारदार,

सरकारी मकान पर अधिकार जमाये हैं,

मज़दूर-सफाईकर्मी को टूटे-फूटे झोंपड़े भी नहीं मयस्सर।

पढे-लिखे को दफ्तर, कुर्सी और एसी का है प्रावधान,

मजदूरों को चाय पीने के लिए भी कुर्सी का नहीं कोई विधान,

पढ़े-लिखे ऑफिसर टॉइलेट में भी ताला लगा देते,

मज़दूर गंदगी में ही अपना काम है निपटा लेते।

यह कैसी सरकारी संस्थान है, यह कैसा ध्रुवीकरण है,

एक को अच्छी सैलरी भी मिलता और साथ में मुफ्त में दवाई,

गरीब मज़दूर दवा-दारू के लिए पड़ेशान हैं,

फी न भर पाने के कारण मिलती नहीं बच्चों को अच्छी पढ़ाई।

एक को मिल रहा नौकरी के स्थायीकरण का लाभ,

दूसरे का मालिक बदलता रहता हर साल,

नौकरी जाने का डर हर पल प्रतिपल,

सताता रहता है मजदूरों को सालों-साल।

जिनके माता-पिता हैं पढ़ाने में उत्तम,

उनके ही बच्चों को मिलता रहता पब्लिक-स्कूल में शिक्षण

कभी पब्लिक स्कूल में उनके बच्चे भी पढ़ पाएंगे,

बड़ा हो वे भी साहब बन जाएंगे,

ऐसे सपनों को देखा करते हैं,

ये कम पढ़े लिखे, ज्ञान की ज्योति से दूर मजदूर।

यह परिवर्तन कब आएगा,

मजदूरों के सपने कब पूरा होंगे,

कब मिलेंगे उनको अच्छा मकान,

कब मिलेंगे उनके बच्चों को उत्तम ज्ञान?

साथियों मैं एक कविता पुनः लिखना चाहता हूँ,

मैं पुनः सबको आगाज देने चाहता हूँ,

जागो, युवां जागो, आगे आओ लेकर इस मशाल को,

एक बार फिर, गली-गली के मीरा लर्निंग सेंटर में चलाओ ट्यूशन,

बन जाय युग परिवर्तनकारी अपना यह नवोदय मिशन।

(”जय हिन्द”)

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